Haldwani News…..रमोलिया हाउस में सात दिवसीय रचनात्मक लेखन कार्यशाला संपन्न |Click कर पढ़िये पूरी News

सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस
हल्द्वानी। सरस मार्केट स्थित रमोलिया हाउस में आयोजित सात दिवसीय रचनात्मक लेखन कार्यशाला सोमवार को संपन्न हो गई। समापन सत्र में चर्चित कवि-लेखक डॉ. अनिल कार्की ने कहा, भागदौड़ भरे समय में स्वयं को समझने और अभिव्यक्त करने का लेखन सबसे प्रभावी माध्यम है। जो व्यक्ति लिखता है, वह समय और परिस्थितियों से निरंतर संवाद करता है। लेखन व्यक्ति को संवेदनशील और जिम्मेदार बनाए रखने में भी मदद करता है।
डॉ. कार्की ने बेहतर लेखन के लिए अधिक पढ़ने पर जोर दिया, कहा कि पढ़े बिना अच्छा लिखना संभव नहीं है। उन्होंने प्रतिभागियों से साहित्य के साथ निरंतर जुड़ाव बनाए रखने की अपील की।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को अपने बचपन को पत्र लिखने का अभ्यास दिया गया था। दिनेश सिंह, आनंद सिंह बसेड़ा, अंकित चौधरी, अजय नेगी और ऐश्वर्या ने अपने बचपन को लिखे पत्र पढ़े, जिनमें स्मृतियों की गंध, बीते दिनों की धूप और अधूरे सपनों की टीस झलकती दिखाई दी।
कहानी लेखन में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों में ज्योति उपाध्याय चुफाल की आत्मकथात्मक रचना ‘मेरी कहानी’ और हर्षिता रौतेला ‘बुलबुल’ की प्रश्नाकुल कहानी ‘क्या मैं अकेली हूं?’ ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया। अजय नेगी, धीरज पड़ियार, मुकुल, आशा पांडे और प्रकाश पांडे की कहानियों ने भी उपस्थित लोगों के मन में गहरी छाप छोड़ी।
इस सत्र में वरिष्ठ रंगकर्मी चारु तिवारी, हरीश जोशी, घनश्याम भट्ट और हर्षवर्धन वर्मा ने भी प्रतिभागियों को साहित्य और रंगमंच से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला ने कहा कि डॉ. अनिल कार्की के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यशाला प्रतिभागियों के लिए सीखने और आत्मखोज का महत्वपूर्ण अवसर रही।
समापन पर कुमाऊंनी लोकगायक दीवान सिंह कनवाल के निधन पर मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। आयोजक दिनेश सिंह और अंकित चौधरी ने बताया कि जल्द ही फिर से रचनात्मक लेखन कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
हल्द्वानी। सरस मार्केट स्थित रमोलिया हाउस में आयोजित सात दिवसीय रचनात्मक लेखन कार्यशाला सोमवार को संपन्न हो गई। समापन सत्र में चर्चित कवि-लेखक डॉ. अनिल कार्की ने कहा, भागदौड़ भरे समय में स्वयं को समझने और अभिव्यक्त करने का लेखन सबसे प्रभावी माध्यम है। जो व्यक्ति लिखता है, वह समय और परिस्थितियों से निरंतर संवाद करता है। लेखन व्यक्ति को संवेदनशील और जिम्मेदार बनाए रखने में भी मदद करता है।
डॉ. कार्की ने बेहतर लेखन के लिए अधिक पढ़ने पर जोर दिया, कहा कि पढ़े बिना अच्छा लिखना संभव नहीं है। उन्होंने प्रतिभागियों से साहित्य के साथ निरंतर जुड़ाव बनाए रखने की अपील की।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को अपने बचपन को पत्र लिखने का अभ्यास दिया गया था। दिनेश सिंह, आनंद सिंह बसेड़ा, अंकित चौधरी, अजय नेगी और ऐश्वर्या ने अपने बचपन को लिखे पत्र पढ़े, जिनमें स्मृतियों की गंध, बीते दिनों की धूप और अधूरे सपनों की टीस झलकती दिखाई दी।
कहानी लेखन में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों में ज्योति उपाध्याय चुफाल की आत्मकथात्मक रचना ‘मेरी कहानी’ और हर्षिता रौतेला ‘बुलबुल’ की प्रश्नाकुल कहानी ‘क्या मैं अकेली हूं?’ ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया। अजय नेगी, धीरज पड़ियार, मुकुल, आशा पांडे और प्रकाश पांडे की कहानियों ने भी उपस्थित लोगों के मन में गहरी छाप छोड़ी।
इस सत्र में वरिष्ठ रंगकर्मी चारु तिवारी, हरीश जोशी, घनश्याम भट्ट और हर्षवर्धन वर्मा ने भी प्रतिभागियों को साहित्य और रंगमंच से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला ने कहा कि डॉ. अनिल कार्की के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यशाला प्रतिभागियों के लिए सीखने और आत्मखोज का महत्वपूर्ण अवसर रही।

समापन पर कुमाऊंनी लोकगायक दीवान सिंह कनवाल के निधन पर मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। आयोजक दिनेश सिंह और अंकित चौधरी ने बताया कि जल्द ही फिर से रचनात्मक लेखन कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
