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क्या करें | वक्त के मारे बेचारे ठेेलीवाले

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महज तीन घंटे ही चल रहा है ठेली वालों का काम
तीन घंटे के काम में भी तहबाजारी शुल्क देने की मजबूरी
सिटी लाइव टुडेे, ़भगवान सिंह रावत, ऋषिकेश
कोविड में हाल-बेहाल हैं। दो जून की रोटी के लाले पड़े हुये हैं। गरीब तबका सबसे ज्यादा परेशान और हताश है।
ठेली वाले हैं बेचारे, वक्त के मारे हैं। लेकिन कोविड की मार अलग से और तहबाजारी शुल्क अलग से देने की मजबूरी। सुबह 8 से 11 बजे तक ठेली लगाने का नियम हैं ऐसे मंे तहबाजारी शुल्क दे तो कैसें, लेकिन ठेकेदार द्वारा तहबाजारी शुल्क वसूलने में कोई कोर कसर नहीं छोडी जा रही है। कोई रिहायत नहीं दी जा रही है।

नगरपालिका मुनि की रेती ढाल वाला के तहबाजारी ठेकेदार द्वारा महामारी की मार झेल रहे फल सब्जियों की ठेली वालों से तहबाजारी शुल्क लिया जा रहा है, जिसको गलत नहीं कहा जा सकता है। ये नियम के अनुसार ही हो रहा है लेकिन सवाल यह है कि ठेली वाले तहबाजारी शुल्क कैसे दें। क्षेत्र के कैलाश गेट, 14 बीघा, ढाल वाला में सड़क किनारे फल सब्जियों वालों को प्रशासन द्वारा 8 से 11 बजे तक अनुमति दी गई है।

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फल विक्रेता विनोद ने बताया कि आजकल अन्य रोजगार दिहाड़ी मजदूरी बंद होने के कारण ज्यादातर इस धंधे में आ रहे है जिसके चलते बिक्री पर बहुत ज्यादा असर पड़ा है और मात्र 3 घंटे ही समय मिल पाता है कभी-कभी तो 100 रुपये की भी बिक्री नहीं हो पाती और खराब फल सब्जियों को फेंकना पड़ता है। यहि बात तहबाजारी वसूली करने वाले को भी बतायी गयी परंतु फिर भी 20 रुपये प्रति ठेली वसूली की जा रही है! इस बारे में अधिशासी अधिकारी बद्री प्रसाद भट्ट ने कहा कि यह ठेकेदार के विवेक पर निर्भर करता है पालिका द्वारा तहबाजारी का ठेका दिया गया है फिर भी मामले में संज्ञान लिया जायेगा।

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